कलपुर्जे

कलपुर्ज़े बन गये इंसान
मुर्दा हैं ज़िंदा इंसान
जिये कोई या फिर मरे
विचलित नहीं होता इंसान

कितना निश्चिन्त और व्यस्त
घर पड़ोसी का हो रहा ध्वस्त
फिर भी नहीं घबराता इंसान
वाह रे ! आज के आधुनिक इंसान

आँख मूँद कर चले इंसान
झूठ मूठ की रखे पहचान
सम्पर्क विस्तार है करता फिरता
काम किसी के न आता इंसान

मीठा मीठा बोले इंसान
देख ख़ूब मुसका़ये इंसान
पर मौक़े पर हो जाता गुम
भोला भाला चतुर इंसान

Published in: on September 8, 2014 at 6:00 am  Leave a Comment  

मीरा

प्रेम में मगन हो मीरा नाचे
श्याम सलोने की बंसी बाजे
सुध बिसराये नाचे मीरा
मधुर छवि उर भीतर साजे।

मेरे हृदय बस तूँ ही मोहन
सुंदर श्यामल अनोखी चितवन
सदा रहूं में संग तुम्हारे
यही आस बसी है मोरे मन.

तुम बिन मैं यूँ , जैसे जल बिन मीन
नैनन में छवि , मन तुम में लीन
जीना मरना तुम संग मोहना
मैं तुझ में तू मुझ में विलीन

Published in: on August 20, 2014 at 5:11 am  Leave a Comment  

तिरंगा

तिरंगा है मान देश का
शान और पहचान देश का
हमको है इस पर अभिमान
गौरव और सम्मान देश का।

रंग इसके प्रतिबिम्ब हमारे
हमको अपनी जान से प्यारे
करने को हम इसकी रक्षा
अपना तन मन सब कुछ वारें ।

केसरिया रंग प्रतीक वीरों का
हरा रंग लहराते खेतों का
चक्र दर्शाता प्रगति चक्र को
सफ़ेद रंग अहिंसा ,प्रेम का ।

जी जान से करें हम रक्षा
इसका गौरव न पड़ने दे फीका
हम देश से देश हमीं से
आगे बढ़ने की सब करें समीक्षा।

“मैं’ छोड़ अब ‘ सब’ हो जाये
ख़ुद बढे औरौं को भी बढ़ाये
देश हमारा भी बढ़ता जायेगा
ऐसा कुछ जो हम कर पायें।

Published in: on August 12, 2014 at 12:14 pm  Leave a Comment  

नग्न

जालिमों ने किया नग्न
और मेरा शील भंग
अंग अंग भी किये भंग
काम न आया मेरा द्वन्द

अपराध मुझसे क्या हुआ
क्या नारी होंना अभिशाप हुआ
डर कर जीयूं क्यूँ प्रति पल
क्यूँ मानव यूँ बदहवास हुआ .

नग्न को भी कर रहे नग्न
कर रहे हर जगह प्रदर्शन
मेरी वीभत्स दुर्दशा का
करुना विहीन ,न है संवेदन .

Published in: on July 21, 2014 at 3:38 pm  Leave a Comment  

बरखा रानी

अब तो आ जाओ बरखा रानी
बरसाओ पानी न करो मनमानी
सूखी धरती और ताल तलैया
तू ने क्यूँ , न आने की ठानी

बैठे सब , तेरी राह निहारें
बेहाल हो , सब तुझे पुकारें
जल्दी करो, अब आ भी जाओ
मीठा जल बरसा जाओ .

पेड़ पंछी हुए हैं बेहाल
ताके अम्बर हो के दीन
फल फूल भी हैं कांति हींन
गंध और रस विहीन .

काहे को इतनी देर करो
जग पर अब तो मेहर करो
धरती का आँचल है सूना
आकर फिर इसे हरा करो .

काले बादल औढ के आओ
अम्बर से तुम जल बरसायो
सूखी धरती की प्यास बुझा कर
वर्षा फिर से पावन बन जाओ .

कर रहे हैं सब मनुहार
जल्दी से आ जाओ इस बार
जल थल कर दो फिर से धरा पर
खुशहांली का लगा दो अम्बार .

पेड़ पंछी हैं बेहाल, ताके अम्बर होके दीन
फल फुल हैं कांति हींन, गंध और रस विहीन

Published in: on July 11, 2014 at 3:49 am  Leave a Comment  

 

What is life.

 

Life is like a book,

every page unfolds a new truth

It is your decision as to how you took

The message conveyed in its looks.

 

Life is a riddle

Checking your power

To use the intellect

And the inherent critcal powers.

 

Life is a unique experience

Live it to the fullest

Don’t waste your wonderful moments

In criticism and fowl play.

 

 

Let your life be an example

Of serenity and wisdom

Giving solace to every soul

That comes your way  .

Published in: on May 2, 2014 at 10:36 am  Leave a Comment  

गणतंत्र

 

गणतंत्र की इस बेला पर

गण का हुआ क्या दारुण हाल

चीत्कार करती महिलाएँ

जन जन लगा रहा गुहार.

 

नया संविधान था लागू हुआ

तोड़ मोड़ कुछ जोड़ हुआ

युवा  से अब वह प्रोढ़ हुआ

नया अनोखा रूप हुआ.

 

नयी व्याख्याएँ नयी सोच

मनचाही धाराएं की गयी व्यक्त

शासन फिर भी कमज़ोर हुआ

त्राही त्राही का शोर हुआ.

 

रो रहे शहीद स्वर्ग में

 देख कर यह देश का हाल

कोई तो फिर से उठायो

नवचेतना परिवर्तन की मशाल

 

रोको अब अनहोनी को

रचो फिर से नया इतिहास

वक्त की सुन लो पुकार

सुनें सभी विजय की डंकार.

 

 

 

Published in: on May 2, 2014 at 10:03 am  Leave a Comment  

My Dear teacher

 

My Teacher

Oh , my dear teacher

I still adore thee

You  still live deep within

In the warmth of my heart  indeed.

 

You taught me little words

Of glory and pride

They lifted my life

 to Present adorable heights.

 

You gave me name and fame

Lit my heart with compassionate flame

To kindle love in self and

my brethren.

 

You are the architect

Of world to come

The angel of wisdom

Compassion and  love.

 

 

 

Published in: on September 5, 2013 at 12:25 pm  Leave a Comment  

गैंगरेप

गैंगरेप

गैंगरेप का हुआ रिवाज़

लुट गई महिला सरे बाज़ार

आंदोलन और शौर हुआ

लो एक रेप फिर और हुआ.

 

कभी किसी मदांध ने लूटा

मनचले किशोर ने मचाया उत्पात

किसी संत ने किया बर्बाद

किसको दे नारी आवाज़.

 

समाज को बदलना होगा

हुई यह आवाज़ बुलंद

कौन करेगा अब आगाज़

सब बैठे हैं किए आँखें बंद.

नारी है आधार समाज की

मत करो तुम इसे  मलिन

धराशाई हो रह जायेगे

सारी संस्कृति के प्रतिबिंब.

 

आत्मचिंतन का समय है अब

अभी नहीं तो करेंगे कब

लुटने न दें अपनी धरोहर

कर दें मनमानी को अब बंद.

Published in: on August 23, 2013 at 10:43 am  Leave a Comment  

स्वतंत्रता

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तन्दरुस्त ही नहीं मन दरुस्त भी बनो
स्वतंत्र हो विषय विकारों से
लोभ अहंकार को दे तिलांजलि
अपनाओ श्रेष्ठ विचारों को.

धन दौलत को हरना छोड़ो
व्यर्थ चिंतन है घातक सोचो
घुन बनकर सब खा जाता है
मानव एक गुलाम सरीखा,बैठा बस पछताता है.

जब होंगे मुक्त इस परतंत्रता से
सुनहरा जीवन बन जाएगा
कलह कलेश न पास आएगा
स्वछंद मन लहराएगा.

यही है जीवन की स्वतंत्रता
जियो और जीने दो की परंपरा
मानव जीवन अनमोल है
शुभचिंतन का ही मोल है.

आओ एक बार फिर हों आज़ाद
मुक्त धरा में न हो विषाद
सहयोग स्नेह का गायन हो
जहाँ में हर जीव का मान हो.

Published in: on August 14, 2013 at 11:10 am  Leave a Comment