नन्ही चिड़िया

सुबह सुबह इक नन्ही चिड़िया, डाले मेरे अंगना डेरा

दस्तक दे कर मुझे जगाये , रोज़  लगाती है वह फेरा.

लगे मुझे वो बहुत सगी सी, अपनी कोई बहुत करीबी

करूँ प्रतीक्षा मैं भी उसकी, खिले  देख उसे   मन मेरा .

रहता उसका मुझे इंतज़ार , आँखे देखें उसकी राह

बिन देखे न पड़ता चैन , मिलने की है रहती चाह .

बनी है वह  जीवन का हिस्सा, लगता कोई पुराना किस्सा

बैठ मुंडेर पर मुझे निहारे, अद्भुत सा संयोग है वाह रे .

कोई कहानी रही अधूरी , पिछले जन्म की शायद मेरे

उसे आकर पूरा है करती, रोज़ आ  कर वह फेरे भरती .

कुदरत के भी खेल निराले , छूट सके न चाह कर भी

पूरे करने को सब वादे , लौटें फिर अपने ही डेरे .

हम सब वादे पूरे करते , रूप अनेक है हम धर कर  ,

किसी रूप में किसी तरह से, रहें मिलते बहुत यत्न कर.

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Published in: on April 17, 2015 at 1:19 pm  Leave a Comment  

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