अबला

क्यूँ पुकारें तुझे कह अबला

तू तो है सृष्टि का आधार

सिखलाती सब को व्यवहार

करती जीवन का उद्धार.

 

तू न होती तो कुछ भी न होता

हर प्राणी भूखा ही सोता

जीवन लेते ही हो जाता गुम

न वो होता न उसकी दुम.

 

तू ही तो है शक्ति का स्त्रोत

सिखलाती मूल्य और भरती जोश

कहाँ हो गयी तुझसे चूक

जो नर्शन्स हो गया तेरा पूत.

 

कैसे भूल गया वो तेरा त्याग

तेरा वर्चस्व और लाड़ प्यार

झपटे है तेरे आँचल पर

बैठा रहता लगाए घात.

 

गिरावट की हो गयी परिणति.

उठो रोक दो लहर अवनति की

तुझको ही अब कुछ करना होगा

आंधियारे को हरना होगा.

 

ज्ञान कलश को थाम लो हाथों में

नवचेतना तुम भर दो जग में

सब तो सगे अपने ही हैं

अज्ञान के आंधियारे में भटके है

 

नया समाज है  तुम्हें बनाना

जनजन को नींद से है जगाना

सुबह जल्दी ही आ जाएगी.

फैले विषाद को खा जाएगी.

Advertisements
Published in: on October 13, 2012 at 1:18 pm  Comments (2)  

The URI to TrackBack this entry is: https://lataspeaks.wordpress.com/2012/10/13/%e0%a4%85%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a4%be-2/trackback/

RSS feed for comments on this post.

2 CommentsLeave a comment

  1. बहुत सच कहा है..लाज़वाब सार्थक प्रस्तुति..बहुत अद्भुत अहसास…सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी…….कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने……….बहुत खूब,बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये. मधुर भाव लिये भावुक करती रचना,,,,,,

  2. Madan ji , Bahut Dhanyavad,Sorry,pahle nahin jawab de payi.Shukriya.

    Suksham

    ________________________________


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: